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Thursday, 20 September 2012

प्रसिद्द हिंदी साहित्यिक पत्रिका "अनुभूति" की वेबसाइट पर रामधारी सिंह दिनकर के सम्बन्ध में गलत जानकारी, परिवर्तन-2020 ने की शिकायत


सेवा में,
संपादक महोदय, 
अनुभूति पत्रिका व वेबसाइट  

सादर नमस्कार,
अपने प्रिय लेखको-कवियों की रचनाये देखकर मन को जबरदस्त ख़ुशी की अनुभूति  "अनुभूति" वेबसाइट को देखकर होती है |वेबसाइट पर न केवल महान कवियों-लेखकों के बारे में जानकारी मिलती है बल्कि उनकी पूरी तरह प्रमाणिक रचनाये भी एक जगह इकठ्ठा पाकर अपनी ज्ञान पिपासा को सुकून भी मिलती है | इस तरह के संकलन करने का जो भागीरथी प्रयास आपने किया है उसके लिए आपको साधुवाद|

महोदय, आपके वेबसाइट पर रामधारी सिंह दिनकर के सम्बन्ध में कुछ जानकारियां दी गयी है| इसमें आपने लिखा है 
कि दिनकर जी  ""1950 से 1952 तक मुजफ्फरपुर कालेज में हिन्दी के विभागाध्यक्ष रहे""- इसमें सुधार की पूरी गुन्जायिश है | आपके जानकारी के लिए मै बताना चाहता हूँ कि मुजफ्फरपुर कॉलेज नाम से कोई भी कॉलेज मुजफ्फरपुर में नहीं है और जहाँ तक दिनकर जी का मुजफ्फरपुर से संबंध का सवाल है तो सभी जानते है कि वे लंगट सिंह महाविद्यालय(एल.एस.कॉलेज) में शिक्षक थे|   

अतः आपसे विनम्र आग्रह है कि दिनकर जी से सम्बंधित वेबसाइट में दी गयी जानकारी(लिंक- 
http://www.anubhuti-hindi.org/gauravgram/dinker/index.htm) में तुरंत सुधार करने का कष्ट करें | इसके लिए हम एल.एस.कॉलेज के पूर्व छात्र आपके सैदेव आभारी रहेंगे |

सादर,
 
भवदीय 
अभिषेक रंजन
पूर्व छात्र एल.एस.कॉलेज व संयोजक- परिवर्तन-2020 .

वेबसाइट में व्याप्त गलतियों को सुधारने के लिए लिखा गया पत्र

वेबसाइट के तरफ से आया मेल ....बस 5 मिनट की मेहनत में लिखा गया पत्र का असर, गलतियाँ तुरंत सुधार दी गयी

Saturday, 30 June 2012

UGC वेबसाइट पर कॉलेज के बारे में अधूरी सुचना, मंच ने की शिकायत



विषय- UGC की वेबसाइट के अक्षम्य त्रुटियों पर ध्यान दिलाने के सम्बन्ध में.

महोदय,मैं आपका ध्यान UGC की वेबसाइट के अक्षम्य त्रुटियों पर दिलाना चाहता हूँ. वेबसाइट के इस लिंक- http://www.ugc.ac.in/inside/browse_reco_colleges.php?resultpage=2&st=Bihar पर जाने के बाद बिहार के कॉलेजों की जानकारी मिलती है जिसमे कॉलेजों के नाम, स्थान, स्थापना वर्ष व उनकी स्थिति (UGC के तहत) शामिल है. वेबसाइट पर जाकर जब हम लंगट सिंह महाविद्यालय, जिसे आपने एल.एस.कॉलेज (L.S.College) के नाम से संबोधित किया है,  के बारे में उपलब्ध जानकारी देखते है तो वह इस प्रकार मिलती है ---L.S. College, MUZAFFARPUR. DIST.:Muzaffarpur,Bihar, Yr Estd.: 0000 Status: 2(f)&12(B) .

जो पहली गलती इसमें दिखती है वह यह कि वेबसाइट पर कॉलेज का नाम अधुरा लिखा गया है . कॉलेज का पूरा नाम लंगट सिंह महाविद्यालय (Langat Singh College) है. आप चाहे तो इसे सुविधा के लिए कोष्टक का इस्तेमाल कर छोटे रूप में इस प्रकार लिख सकते है-- Langat Singh College (L.S.College). 

दूसरी गलती कॉलेज के स्थापना वर्ष के स्थान पर चार जीरो( ००००)  है, जिसका मतलब है कि UGC जैसे संस्था को भी कॉलेज का स्थापना वर्ष मालूम नहीं है . यह अत्यंत दुखद और कॉलेज के संस्थापकों का अपमान है. तमाम दस्तावेज उपलब्ध है कि कॉलेज की स्थापना ३ जुलाई, 1899 को हुई थी.

यह महाविद्यालय प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर, प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी आचार्य जे.बी.कृपलानी सहित अनेक राजनीतिक, सामाजिक लोगों से जुड़ी है जिससे कॉलेज की अपनी एक अलग प्रतिष्ठा है. दुनिया भर के लोग कॉलेज के बारे में अधिकारिक सुचना के लिए UGC की वेबसाइट देखते है, जहां उन्हें अधूरी जानकारी मिलती है.
 
अतः आपसे विनम्र आग्रह है , अविलम्ब इस गलती को सुधारने सम्बन्धी करवाई करे . चार दिनों बाद कॉलेज अपनी स्थापना दिवश मनाने वाला है, तब तक गलती वेबसाइट से सुधार दी जाएगी, ऐसी उम्मीद है .

भवदीय
अभिषेक रंजन
पूर्व छात्र- लंगट सिंह महाविद्यालय
मुजफ्फरपुर, बिहार |
मो. +91-9717167232
ईमेल- arkumar87lsc@gmail.com 
(नोट:- यू.जी.सी. के सम्बंधित पदाधिकारी, अध्यक्ष, क्षेत्रीय मुख्यालय और लोकशिकायत  अधिकारी को मेल के द्वारा पत्र भेजा गया है।)

Friday, 13 April 2012

Shift of thinking -- पर्यटन स्थल से राष्ट्रिय धरोहर की यात्रा

कुछ भी मुश्किल नहीं, यदि करने की ठान लीजिये......यही हुआ एल.एस. कॉलेज को राष्ट्रिय धरोहर बनाने के मुहीम की शुरुआत में |  कॉलेज को सिर्फ पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की बातें होती थी, पर्यटन के दृष्टि से कॉलेज सुन्दर बने, रमणीय लगे, कुछ देखने लायक चीज़े हो, इसके लिए पैसे सरकार से मांगे जाते रहे | लेकिन दुखद तथ्य यह था कि पर्यटन स्थल के रूप में कॉलेज जाना जाये, इसमें सिर्फ गाँधी जी तक ही बात जाकर समाप्त हो जाती थी | कॉलेज का समग्रता से विकास हो, इसके इतिहास के गौरवशाली क्षण कि अनुभूति लोग करे, इस हेतु राष्ट्रिय धरोहर की मांग करना कॉलेज की चर्चाओं में एक ऐतिहासिक मोड़ था|  जब हमने राष्ट्रिय धरोहर की बात बुलंदी से, तर्कपूर्ण ढंग से रखी तो सभी के चिंतन-मनन का यह विषय बना की क्या वास्तव में कॉलेज राष्ट्रिय धरोहर बनने का पात्र है?

इससे पहले कॉलेज के बारे अधिक लोग जाने, कॉलेज के इतिहास की चर्चाये हो तो बात सिर्फ गाँधी जी के चंपारण यात्रा की याद से जुड़ी गाँधी-कूप तक ही सिमित हो जाती थी | गाँधी जी का ऐतिहासिक यात्रा के सन्दर्भ में कॉलेज में ठहरना, उनके स्वागत में उमड़ी छात्रों की हुजूम, छात्रों का गाँधी जी की बग्घी अपने कन्धों पर खीचकर लाने का विर्तांत तक ही कॉलेज के ऐतिहासिक महत्व की सारी बातें सिमट जाती थी | लेकिन उस चंपारण यात्रा के सूत्रधार आचार्य जे. बी. कृपलानी, गाँधी जी को कॉलेज हॉस्टल में ठहराने के कारण बर्खास्त विद्वान आचार्य मलकानी को याद करना जरुरत नहीं समझा जाता था | राजेंद्र बाबु का कॉलेज के प्राध्यापक के रूप में आना, प्राचार्य(Principal) बनना, कॉलेज के वर्तमान स्थल का चयन करने की चर्चा कही देखने को नहीं मिलती थी | यह मांग भी नहीं उठाई जाती थी कि रामधारी सिंह दिनकर से जुड़ी यादों को भी सहेजा जाये, उसके बारे में बताया जाये|  कॉलेज कि गरिमा बढ़ाने वाले अनेक संस्मरणों को याद करके उसे एक पुस्तकालय या संग्रहालय का रूप दिया जाये, इसके बारे में कोई प्रयास नहीं  हुआ |

आप देख सकते है कॉलेज प्रशासन ने सिर्फ गाँधी जी का जिक्र किया और महाविद्यालय के जुड़े अन्य महापुरुषों को छोड़ दिया गया |

पर्यटन स्थल बनाने को लेकर कॉलेज प्रशासन द्वारा लिखे गये पत्र
इस पत्र को लिखने के परिणामस्वरूप कॉलेज को 65 लाख रुपये मिले ।

इस सम्बन्ध में "द टेलेग्राफ" अख़बार में छपी खबर  देखा जा सकता है

                                             
Gallery to remember Gandhi’s historic visit



    



Muzaffarpur, Jan. 20: For those who are taken in with Gandhigiri, here is some good news. The state government is all set to establish a new gallery on the Father of the Nation in Langat Singh College, a constituent unit of Bhim Rao Ambedkar Bihar University.
The government has sanctioned Rs 65 lakh for the gallery, named Mahatma Gandhi Memorial Gallery. Tourism department officials inspected the spots of historical importance related to Gandhi in the district recently.
On April 10, 1917, Gandhi had visited Muzaffarpur en route to East Champaran, for the satyagraha there. He also took a bath near a well on the college campus. The well has been named Mahatma Gandhi Kup, and is renovated from time to time.
The historic well will now be fenced and made a part of the historic display, said Suniti Pandey, the principal of the college. A statue of Gandhi was also installed in front of the principal’s office recently. Bhim Rao Ambedkar Bihar University gave the college Rs 1 lakh for the renovation of the statue. Rajendra Prasad installed a bust of Gandhi on the same spot in 1959. Later, in 1971, Jai Prakash Narayan had unveiled a statue of Gandhi on the spot.
The tourism department team also visited Gorakhpur High School on Tilak Maidan Road, where Gandhi had spent a week in 1934 to supervise the relief and rescue operations in the aftermath of a devastating earthquake. The team also visited the houses of J.P. Kripalani and Raj Kumar Shukla, where Gandhi had spent time, in the course of his long political career.
Tourism minister Sunil Kumar, who visited some of the spots today, said: “The government will prepare a roadmap of tourism of the places of historic and religious importance in the state, particularly in north. Tour buses would be started and hotels and restaurants would be constructed along the national highways for the tourists.”  (खबर की लिंक -http://www.telegraphindia.com/1110121/jsp/bihar/story_13469488.jsp)




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आप मीडिया शीर्षक के अंतर्गत डाले पोस्ट में देख सकते है की ३ जुलाई, २०११ को मुजफ्फरपुर से छपने वाले सभी अखबारों ने राष्ट्रिय धरोहर बनाने की मांग की खबरे छापी।

Wednesday, 23 March 2011

नयी पहल:राष्ट्रिय धरोहर के लिए

ऐतिहासिक लंगट सिंह कॉलेज को राष्ट्रिय धरोहर के रूप में दर्ज़ा देने हेतु आज विद्यार्थियो की तरफ से एक पहल के तौर पर प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा गया। संसद के सत्र प्रारंभ रहने के कारण प्रधानमंत्री कार्यालय के सम्बंधित पदाधिकारी ने तुरंत कुछ कहने में असमर्थतता जताई लेकिन पत्र का जबाब जल्द से जल्द आगे की करवाई के योजना सहित भेजने का वादा किया है।


अभी तक क्या हुआ 
लंगट  सिंह कॉलेज से संबंधित एक ध्यानाकर्षण प्रस्ताव  सरकार के समक्ष राष्ट्रिय जनता दल के विधायक डॉ.रामचन्द्र पूर्वे ने बिहार विधानसभा में पिछली  सरकार(नितीश सरकार के प्रथम कार्यकाल में)  में उठाया था जिसके सन्दर्भ में महाविद्यालय के पास एक पत्र भी आया था | इस पत्र में  सारी ऐतिहासिक दस्तावेजों को संकलित कर भेजने का निर्देश मिला था। फिर इतिहास विभाग के शिक्षक डॉ.अशोक अंशुमन ने इस दिशा में कुछ प्रयास किये , परन्तु अभी तक मामला निष्कर्ष तक नहीं पंहुचा और कही कही गाँधी से जुड़ी बातों तक ही सिमटी  रही।
विदित हो की इससे पहले महाविद्यालय की तरफ से कॉलेज में स्थित महात्मा गाँधी से जुड़ी चीजों और यादों को सहेज़ने हेतु दिनांक 29/6/2009 को एक पत्र पर्यटन मंत्री को भेजा गया था जिसके जबाब में जिलाधिकारी की अनुसंसा के पश्चात् एक दैनिक समाचार पत्र के रिपोर्ट के मुताबिक 65लाख रुपये मिले। परन्तु  ये सारी गतिविधियाँ सिर्फ गाँधी के यादों और उनसे जुडी चीजों तक ही सिमित रह गयी, जबकि इस महाविद्यालय से अनेक महत्वपूर्ण लोग जुड़े हुए थे, जैसे डॉ.राजेंद्र प्रसादआचार्य जे.बी.कृपलानीरामधारी सिंह दिनकर आदि। इनसे  जुड़ी बातो की तरफ तो महाविद्यालय प्रशासन का ध्यान रहा और न हीं सरकार के तरफ से इस दिशा में कोई ठोस कदम अबतक उठाई गयी है। दिनकर का जन्मसताब्दी समारोह भी ढंग से एक सप्ताह नहीं मनाया गया और राजेंद्र प्रसाद के याद में सालाना (लगभग) आयोजित होने वाला इतिहास विभाग का सेमिनार विश्वविद्यालय और महाविद्यालय के लिए सिर्फ औपचारिकता मात्र है ,क्योंकि तो सम्बंधित पदाधिकारी रूचि लेते है है और धन मुहैया कराने में दिलचस्पी है किसी को 


क्या है पैमाना दर्ज़ा देने की
भारतीय पुरातत्व  विभाग १०० वर्ष से अधिक पुराने स्थल को, जो ऐतिहासिक और कलात्मक दृष्टि से महत्व रखता हो ( 1958 की अधिनियम के अनुसार ), उसे ऐतिहासिक धरोहर का दर्ज़ा प्रदान कर केवल उसके रख-रखाव की व्यवस्था करती है बल्कि उसके व्यापक प्रचार-प्रसार की भी कोसिस करती है ताकि उसके बारे  में अधिक से अधिक लोग जान पाए। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर यह प्रयास शुरू किया गया ।  महाविद्यालय केवल 112 साल पुराना हो चूका है बल्कि इसका भवन भी ऑक्सफोर्ड की तर्ज़ पर बनी रहने के कारण कलात्मक रूचि का भी  है जिसे संरक्षित रखना अत्यंत जरुरी भी  है ।


अभियान की योजना
इस अभियान ( लंगट सिंह कॉलेज को ऐतिहासिक धरोहर का दर्ज़ा दिलवाना) के प्रथम चरण में पत्र के माध्यम से सुचना देने का काम किया गया है ताकि सरकार स्वतः संज्ञान लेते हुए इस कॉलेज के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए इसे राष्ट्रिय धरोहर का दर्ज़ा दे देगी । अगर सरकार के स्तर से कुछ काम नहीं होगा तो अगले चरण में हस्ताक्षर अभियान चलाकर विधानसभा और संसद में इस बात को उठावाया जायेगा ताकि सरकार जन-भावनाओ की क़द्र करते हुए स्वतः मंजूरी दे देगी।  अगर इससे भी कुछ नहीं होता तब आगे की योजना एक बड़ी गोष्ठी के माध्यम से प्रबुद्ध जनों के निर्देश में तय की गयी दिशा में की जाएगी 


सहयोग करने का वादा मिला  
मुजफ्फरपुर के संसद सदस्य जयनारायण निषाद और विधायक  सुरेश शर्मा ने इस सन्दर्भ में कहा है कि उनके तरफ से जो भी संभव होगा वो करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर मामले को सदन में उठाने की भी बात कही है। बेगुसराय के सांसद और सिवान के संसद सदस्य के पत्र का इंतज़ार है, वैसे उनके तरफ से भी मौखित समर्थन की जानकारी मिली है। इसके अतिरिक्त दिनकर स्मृति न्यास  और राजेंद्र प्रसाद के स्मिर्तियो को सहेजने में  जुटे संगठनो ने भी इस कार्य में मदद का वादा किया है। इसके अतिरिक्त फेसबुकऑरकुटब्लाग्स(lscollege.blogspot.com ) जैसे  सोसल  नेट्वोर्किंग माध्यमो से आम जनता  के बीच और खासकर छात्रों के बीच बात को पहुचने का काम जारी है | देश भर के विभिन्न जगहों में पढ़ रहे मुजफ्फरपुर और खासकर L .S .कॉलेज के पूर्व छात्र इसको लेकर काफी उत्साहित भी है.l 
                                   मीडिया के माध्यम से  हमारी अपील है शिक्षकगणविद्यार्थियों , बुद्धिजीवियों और गणमान्य नागरिको से  की इस अभियान को सफल बनाने हेतु हमारा सहयोग करें ताकि कॉलेज  राष्ट्रिय धरोहर बने और कॉलेज के नाम से पूरा देश शहर को जानने लगे .